ष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति श्री वाई. भास्कर राव ने कहा है कि
सशक्त व सुदृढ भारत के निर्माण के लिए आम आदमी को शिक्षित तथा मानवाधिकारों के बारे
में जागरूक बनाना होगा।
श्री राव आज यहां शासन सचिवालय के एस.एस.ओ. भवन में
‘‘मानवाधिकार शिक्षा’’ विषय पर आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
बैठक में
राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति श्री जगतसिंह, श्री धर्मसिंह मीणा,
श्री पुखराज सिरवी एवं महानिरीक्षक पुलिस, मानवाधिकार श्री एन.मोरिस बाबू सहित
विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, चिकित्सक, वकील, शिक्षाविद् एवं शिक्षा
विभाग के अलावा विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।
श्री भास्कर राव ने
अपने उद्बोधन में कहा कि विश्व के अनेक देशों की बजाय भारत की मानवाधिकारों की
रक्षा की दृष्टि से अच्छी स्थिति है फिर भी आज के बढते वैश्वीकरण के दौर में
मानवाधिकारों के प्रति प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक करने के साथ शिक्षित करना बहुत
जरूरी है। उन्होंने माना कि आज के दौर में हर जगह मानवाधिकारों का हनन हो रहा है
इसका मुख्य कारण किसी भी व्यक्ति का मानवाधिकारों की रक्षा के प्रति जागरूक व गंभीर
नहीं होना है।
उन्होंने कहा कि समाज का बुद्धिजीवी वर्ग, वकील, उच्चाधिकारी एवं
शिक्षाविद् भी मानवाधिकारों के प्रति अपने दायित्वों को भलीभांति समझें। उन्होंने
कहा कि भारतीय सेना व राज्यों की पुलिस को भी मानवाधिकार की रक्षा में अपनी समर्पित
व सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिये। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मानवाधिकारों की
रक्षा करना जरूरी हो गया है, इसमें व्यापक जनहित निहित है। उन्होंने विद्या का
महत्व बताते हुए कहा कि विद्या मानव का हर जगह सहयोग करती है। साथ ही विद्या का
ज्ञान दूसरों को देने से इसमें बढोतरी होती है। उन्होंने कहा कि विद्या कभी घटती
नहीं और न ही इसको कोई छीन सकता है।
न्यायमूर्ति श्री राव ने कहा कि आज विश्व के
सामने सबसे बडी समस्या आतंकवाद की है और इस पर नियंत्रण करने के लिये पूरे विश्व
में आज गांधीजी के विचारों और आदर्शों को प्रमुख हथियार माना जा रहा है। उन्होंने
कहा कि सभी शिक्षण संस्थानों के साथ स्वयंसेवी संस्थाओं व अन्य जनकल्याणकारी
संस्थाओं में मानवाधिकार शिक्षा को साथ में चलाना होगा। उन्होंने सभी शिक्षण
संस्थाओं में नैतिक शिक्षा को अनिवार्य रूप से लागू करने की आवश्यकता जताई।
उन्होंने सभी विद्यालयों म शिक्षकों को मानवाधिकार शिक्षा के बारे में प्रशिक्षित
करने पर भी जोर दिया।
इससे पहले राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति
श्री एस.के. जैन ने कहा कि राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के पिछले दो वर्ष के
कार्यकाल में मानवाधिकार के प्रति साक्षरता, प्रचार-प्रसार, जागरूकता एवं अधिकारों
के संरक्षण के लिए लोक सेवकों एवं जनसाधारण में संवेदनशीलता से काम करने को बढावा
मिला है।
उन्होंने यह भी बताया कि मानवाधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिये इस
आयोग एवं राष्ट्रीय आयोग की पहल पर विश्वविद्यालयों में मानवाधिकारों के पाठ्यक्रम
शुरु करने के साथ-साथ शिक्षाविदों के लिये भी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आरंभ किये हैं।
श्री जैन ने कहा कि प्रभावी मानवाधिकार शिक्षा नैतिक गुणों, दृष्टिकोण और व्यवहार
के अलावा मातृत्व भावना के साथ ज्ञान और तार्किक क्षमता भी विकसित करती है। हमारे
रोजमर्रा के जीवन में मानवाधिकारों की संवेदनशीलता हमें उसी प्रकार का व्यवहार करने
के लिए प्रेरित करती है जैसा हम दूसरों से अपेक्षा करते हैं।
बैठक में विभिन्न
स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, वकीलों एवं शिक्षाविदों ने राज्य में अवैध
परिवहन के साधनों से हो रही दुर्घटनाओं, राजकीय शिक्षण संस्थाओं के साथ अन्य निजी
शिक्षण संस्थाओं में नैतिक शिक्षा लागू करने, शिक्षा कार्यक्रम में मानवाधिकार को
डालना, मानवाधिकारों के मतलब के बारे में सबको बताना एवं मानवाधिकार के हनन के
मामले में विभिन्न न्यायालयों द्वारा दिये गये फैसलों को अमल में लाने की आवश्यकता
प्रतिपादित करने के साथ अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिये।
अन्त में आयोग के सदस्य
न्यायमूर्ति श्री जगतसिंह ने धन्यवाद देते हुए मानवाधिकारों के सम्बन्ध में बताया
कि बच्चे के गर्भ में जाने से ही मानवाधिकार शुरु हो जाता है। उन्होंने माना कि आज
हर क्षेत्र में बडा आदमी अधीनस्थ का शोषण करता है और यह भी मानवाधिकार हनन का मामला
है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक आदमी को अपनी सोच को बदलते हुए दूसरे के काम को पूरा
करने में सहयोग करने की सोच विकसित करनी होगी। प्रारंभ में श्री भास्कर राव ने सभी
का परिचय किया।
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